विभाजन की दर्दनाक कहानियां दशको तक न लिखि गई न बोली गई –
विभाजन विभिषिका दिवस पर संगोष्ठी संपन्न
मौन जुलूस निकालकर दी पुण्यात्माओ को श्रृद्वांजलि
बैतूल। विभाजन विभिषिका दिवस पर भाजपा द्वारा गुरूवार को विजय भवन में आयोजित जिला स्तरीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता एवं लोकतंत्र सैनानी मोतीलाल कुशवाह ने कहा कि भारत के विभाजन की दर्दनाक कहानी दशको तक न लिखि गई ,न बोली गई और न ही किसी पाठयक्रम में कोई स्थान दिया गया। कुशवाह ने कहा कि जो राष्ट्र अपने पूराने घाव को याद नही करता वह राष्ट्र सामाजिक रूप से कभी स्वस्थ्य नही रह सकता। उन्होनेे कहा कि विभाजन विभिषिका दिवस उन भूले बिसरे लोगो को याद करने का दिन है जिन्होने विभाजन की त्रासदी को झेला है। कुशवाह ने कहा कि जब तक अखण्ड भारत का सपना साकार नही हो जाता तब तक हम आने वाली पीढी को विभाजन का असली सच बताते रहेगें। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष सुधाकर पंवार ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम कोई राजनैतिक कार्यक्रम नही बल्कि इतिहास की गलतियों से सबक लेने का दिन है। देश का विभाजन हमें याद दिलाता है कि तुष्टिकरण की राजनीति देश के लिए कितना घातक है। वे ताकते आज भी किसी न किसी रूप में सक्रिय है जिन्होने देश का विभाजन स्वीकार किया था। कपूर ने सुनाई विभाजन की त्रासदी – संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कपूर ने कहा कि हमने अपने पूर्वजो से विभाजन के समय हुई त्रासदी के किस्से सूने है। उन बातों को याद कर आज भी रोंगटे खडे हो जाते है। जिन परिवारो ने विभाजन की त्रासदी को जीया है उन्हे आज भी आजादी का जश्न अच्छा नही लगता। कपूर ने बताया कि मेरी दादी बताती थी कि शरणार्थी शिविर में प्रताडनाएं समाप्त नही होती थी। तात्कालिन सरकार ने शरणार्थीयों को हमेशा विरोधी समझा जिसके बाद शरणार्थी पहले संघ के साथ, फिर जनसंघ के साथ और अब भाजपा के साथ दिखाई देते हुए विकसित भारत के निर्माण में लगें हुए है। संगोष्ठी की शुरूवात में विभाजन की विभिषिका पर डाक्युमैन्ट्री फिल्म दिखाई गई। संगोष्ठी का संचालन जिला महामंत्री कमलेश सिंह ने किया वहीं संमापन दो मिनट के मौन के साथ हुआ। संगोष्ठी के दौरान विधायक डा.योगेश पंडाग्रे, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मालवी, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष भास्कर मगरदे मंचासीन रहे। संगोष्ठी समापन के उपरांत भाजपा कार्यालय विजय भवन से मौन रैली निकाली गई जिसका समापन कांतिशिवा चौक पर त्रासदी के दौरान प्राण गवाने वाली पुण्यात्माओं को श्रृद्वांजलि अर्पित कर हुआ।

