गुरुपूर्णिमा पर श्रद्धा का महासंगम: आचार्य शशांक शेखर महाराज का के शिष्यों ने किया चरण पूजन

भोपाल:

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर राजधानी में आस्था, भक्ति और गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। आचार्य शशांक शेखर महाराज के सान्निध्य में आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव में हजारों शिष्यों ने गुरु चरणों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के द्वार पर दीपदान किया तो वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत करते हुए गुरु दीक्षा भी ग्रहण की।

सुबह से ही महाराज के निवास पर गुरु दर्शन के लिए शिष्यों का सैलाब उमड़ पड़ा। उनके शिष्यों ने पुष्प, चंदन, अक्षत एवं दुग्ध से गुरुजी के चरणों का पूजन किया। पूरा परिसर गुरु वंदना, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

अपने आशीर्वचन में आचार्य शशांक शेखर महाराज ने कहा कि “गुरु केवल ज्ञान का दाता नहीं, बल्कि जीवन को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश तक पहुंचाने वाला सेतु होता है।”उन्होंने कहा कि गुरु की शरण में आने वाला व्यक्ति केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी प्राप्त करता है। गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण ही शिष्य के जीवन की सबसे बड़ी साधना है।उन्होंने बताया कि गुरु दीक्षा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, संस्कार और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है।

प्रवक्ता अंकिता ने बताया कि गुरुपूर्णिमा महोत्सव में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य शशांक शेखर महाराज के श्रीचरणों का पूजन एवं दुग्धार्चन कर सेवा अर्पित की। वहीं कुछ भक्तों ने विशेष भजनों से अपने भाव व्यक्त किए।

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना करते हुए गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे समारोह में भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। गुरुपूर्णिमा का यह आयोजन भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक संस्कृति और सनातन मूल्यों के प्रति अटूट आस्था का संगम बन गया।