‘छूकर मेरे मन को…’ में गूंजे किशोर के अमर तराने, सुरों की शाम ने बांधा समां

भोपाल: महान पार्श्वगायक किशोर कुमार की जयंती के अवसर पर रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में रविवार शाम आयोजित संगीतमय कार्यक्रम ‘छूकर मेरे मन को…’ ने संगीत प्रेमियों को स्वर्णिम फिल्म संगीत के उस दौर में पहुंचा दिया, जहां हर धुन दिल की गहराइयों तक उतरती है। केकेएफसी म्यूजिक इंडिया एवं किशोर कुमार फैंस क्लब द्वारा संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से आयोजित इस संगीत संध्या में कलाकारों ने सदाबहार गीतों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसने पूरे सभागार को सुर, स्मृतियों और भावनाओं से सराबोर कर दिया। अजय मिश्रा ने देशभक्ति के भावों से ओतप्रोत “देखो वीर जवानों…” की प्रस्तुति देकर माहौल को ऊर्जावान बनाया। इसके बाद आर.के. बरेले ने “एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल…” गाकर जीवन के दार्शनिक पक्ष को स्वर दिए।
संगीत संध्या के प्रमुख आकर्षण डॉ. कुमार राजेश रहे। उन्होंने अपनी सधी हुई और भावपूर्ण गायकी से “छूकर मेरे मन को…”, “नीले-नीले अंबर पर…” तथा “ये क्या हुआ…” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर तक तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति
मुंबई की युवा गायिका मिहिका ने “मुस्कान झूठी है…” को संवेदनशील अंदाज में प्रस्तुत कर भावनाओं की गहराई को स्वर दिए। वहीं अमीषा मालवीय ने “रुक जा रात ठहर जा…” गाकर अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा। राजेंद्र मालवीय ने “देखा न हाय रे…” तथा नरेश कुमार ने “अकेला चला मैं…” की प्रस्तुति से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। राधिका मिश्रा ने “दिल चीज़ क्या है…” और “सुन रहा है न तू…” जैसे गीतों में शास्त्रीयता और आधुनिकता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। डॉ. संजय पोफली ने “ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय…” के माध्यम से जीवन-दर्शन को सुरों में पिरोया, जबकि अजय श्रीवास्तव ने “आने वाला पल…” और डॉ. टी.एन. दुबे ने “ज़िंदगी का सफर है ये कैसा सफर…” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। युवा गायक उत्सव पारे ने “सितारों की महफिल में गूंजेगा समां…” गीत से संध्या का उल्लासपूर्ण समापन किया। कार्यक्रम के दौरान रितुल हजारिका, दीप चौधरी, निखिल, मुकेश कटारे, शहनाज और जितेंद्र ने विभिन्न वाद्ययंत्रों पर सधी हुई संगत देकर प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बनाया। उनकी संगत ने प्रत्येक गीत में मधुरता और जीवंतता का नया आयाम जोड़ा।