प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से सरिता के हुनर को मिली नई उड़ान
भोपाल :
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्वरोजगार को मिल रहे प्रोत्साहन से भोपाल जिले की कुशवाह ने अपने हुनर को सफल उद्यम में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। कभी पूंजी और आधुनिक संसाधनों के अभाव में सीमित स्तर पर व्यवसाय करने वाली सरिता आज आधुनिक मशीनों, आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर ब्रांडिंग के साथ मसाला एवं कच्ची घानी तेल प्रसंस्करण इकाई का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं।
हुनर था, पूंजी की कमी रोक रही थी कदम
भोपाल जिले के फंदा विकासखंड की निवासी सरिता कुशवाह को मसाले और कच्ची घानी तेल तैयार करने का हुनर पहले से था। उनके मन में अपने व्यवसाय को विस्तार देने का सपना भी था, लेकिन आधुनिक मशीनें खरीदने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं थी। सीमित संसाधनों के कारण उनका व्यवसाय छोटे स्तर तक सिमटा हुआ था और मेहनत के अनुरूप आमदनी भी नहीं हो पा रही थी।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना बनी बदलाव का आधार
सरिता के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब उन्हें उद्यानिकी विभाग, जिला भोपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने मसाला एवं कच्ची घानी तेल प्रसंस्करण व्यवसाय के विस्तार के लिए योजना के अंतर्गत आवेदन किया।
वर्ष 2025-26 में यूको बैंक, भोपाल द्वारा सरिता को 14 लाख रुपये का बैंक ऋण स्वीकृत किया गया। योजना के अंतर्गत उन्हें ऋण राशि पर 35 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी मिला। वित्तीय सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने अपने परंपरागत हुनर को आधुनिक और व्यवस्थित व्यवसाय का स्वरूप देना शुरू किया।
आधुनिक मशीनों से बढ़ी गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता
ऋण राशि से सरिता ने अपनी इकाई में कोल्ड प्रेस ऑयल मशीन, ऑयल फिल्टर मशीन, मसाला पल्वराइजर मशीन और ऑटोमेटिक पैकेजिंग मशीन स्थापित कीं। आधुनिक मशीनों से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता और पैकेजिंग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।
सरिता ने अपने उत्पादों को “मनोज मसाला एवं ऑयल” के नाम से स्थानीय ब्रांड के रूप में बाजार में उतारा। बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग से उनके उत्पादों को बाजार में पहचान मिली और धीरे-धीरे कारोबार का दायरा बढ़ने लगा।
आठ-दस हजार से बढ़कर 70-80 हजार रुपये हुई मासिक आय
व्यवसाय के आधुनिकीकरण का सीधा असर सरिता की आय पर पड़ा। पहले छोटे स्तर पर व्यवसाय से उन्हें लगभग 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी होती थी। अब सभी व्यावसायिक खर्चों और बैंक ऋण की किश्तों का भुगतान करने के बाद भी वे लगभग 70 से 80 हजार रुपये प्रतिमाह का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रही हैं।
सरिता की सफलता केवल उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है। व्यवसाय के विस्तार के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर तीन युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। उनका उद्यम अब उनके परिवार के साथ अन्य परिवारों की आजीविका का भी माध्यम बन गया है।
शासकीय सहयोग ने सपने को बनाया साकार
सरिता कुशवाह अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना, जिला प्रशासन भोपाल तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से मिले मार्गदर्शन को देती हैं। उनका कहना है कि शासकीय योजना से मिली वित्तीय सहायता और विभागीय सहयोग ने उनके हुनर को सफल व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने और छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में प्रभावी रूप से धरातल पर उतारा जा रहा है। सरिता कुशवाह की सफलता इसी संकल्प का जीवंत उदाहरण है।
आज सरिता अपने ब्रांड के माध्यम से बाजार में नई पहचान बना रही हैं। उनकी यात्रा प्रमाणित करती है कि हुनर को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो छोटी शुरुआत भी एक सफल एवं रोजगारपरक उद्यम का रूप ले सकती है।

