कुपोषित बच्चों की मदद अब होगी ट्रैक
भोपाल :
‘भावनी’ बताएगा किस बच्चे को कितनी जरूरत
सत्यापित आंकड़ों से चिन्हित होंगे बच्चे
समाज के मददगार सीधे जुड़ेंगे
सहायता से पोषण सुधार तक हर कदम का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड
कुपोषण के खिलाफ मध्यप्रदेश में सरकारी प्रयासों के साथ अब समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और दानदाताओं की भागीदारी को तकनीक के माध्यम से जोड़ने की पहल की गई है। ‘भावनी’ पोर्टल ऐसा डिजिटल मंच है, जो पोषण संबंधी आवश्यकता वाले बच्चों को मार्गदर्शकों, सहयोगी संस्थाओं और दानदाताओं से पारदर्शी तरीके से जोड़ने का काम करता है। पोर्टल का उद्देश्य केवल किसी बच्चे तक सहायता पहुंचाना नहीं, बल्कि सहायता मिलने के बाद उसकी पोषण स्थिति में हुए बदलाव की निरंतर निगरानी और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना भी है।
पहचान छिपी रहेगी, जरूरत सामने होगी
‘भावनी’ पोर्टल पर महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रणालियों से सत्यापित बाल आंकड़े प्राप्त किए जाते हैं। बच्चों की निजता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती। पोर्टल पर बच्चों की जानकारी अनाम रूप में प्रदर्शित होती है, ताकि जरूरतमंद बच्चे तक सहायता पहुंचने के साथ उसकी गोपनीयता भी सुरक्षित रहे।
बच्चे की जरूरत के अनुसार तय होती है सहायता
‘भावनी’ पोर्टल पर मार्गदर्शक समग्र पहचान क्रमांक के साथ अथवा उसके बिना पंजीयन कर सकते हैं। पंजीयन के बाद वे अपने क्षेत्र में उपलब्ध बच्चों की सूची देख सकते हैं और बच्चे की पोषण स्थिति तथा आवश्यकता के अनुसार उसका चयन कर सकते हैं। सहायता का प्रकार, कितनी बार सहायता दी जाएगी और सहायता से संबंधित अन्य विवरण दर्ज करने के बाद संबंधित बच्चे के लिए विशिष्ट सहायता पहचान क्रमांक तैयार होता है।
इस व्यवस्था से सहायता को सामान्य रूप से वितरित करने के बजाय बच्चे की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप लक्षित किया जा सकता है। इससे सहयोग करने वाले व्यक्ति या संस्था को भी यह स्पष्ट रहता है कि सहायता किस उद्देश्य से और किस प्रकार उपलब्ध कराई जा रही है।
सहायता के बाद भी मॉनिटरिंग जारी रहेगी
‘भावनी’ पोर्टल की विशेषता यह है कि इसमें सहायता उपलब्ध कराने के बाद प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। ‘मेरे बच्चों की सूची’ के माध्यम से मार्गदर्शक संबंधित बच्चों को दी जा रही सहायता की स्थिति तथा उनकी पोषण संबंधी प्रगति का अनुश्रवण कर सकते हैं।
निर्धारित साप्ताहिक अथवा मासिक अंतराल पर बच्चे की स्थिति को अद्यतन किया जाता है। प्रत्येक प्रविष्टि में सहायता की तिथि, सहायता का स्वरूप, बच्चे की पोषण स्थिति, अवलोकन और उपलब्ध प्रमाण दर्ज किए जाते हैं। इससे बच्चे की सहायता और उसकी प्रगति का व्यवस्थित अभिलेख तैयार होता है।
सरकार और समाज के बीच बनेगा मजबूत सेतु
‘भावनी’ पोर्टल सरकारी तंत्र और समाज के बीच समन्वय स्थापित करने का माध्यम भी है। प्रशासनिक स्तर पर पंजीकृत मार्गदर्शकों, सहयोगी संस्थाओं तथा उनसे जुड़े बच्चों की जानकारी देखी जा सकती है। इससे विभाग को यह जानने में सुविधा होती है कि किन बच्चों को सहयोग मिल रहा है और उनकी पोषण स्थिति में क्या परिवर्तन आया है।
इस व्यवस्था में समाज के विभिन्न वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान कर सकते हैं। मार्गदर्शक, सामाजिक संस्थाएं और दानदाता जरूरतमंद बच्चों की पहचान के बाद उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहयोग उपलब्ध करा सकते हैं। इस प्रकार कुपोषण से निपटने के सरकारी प्रयासों को सामुदायिक सहभागिता से और व्यापक बनाया जा सकता है।
वर्ष 2022 में विकसित किया गया पोर्टल
‘भावनी’ पोर्टल का निर्माण सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल द्वारा वर्ष 2022 में किया गया है। पोर्टल को इस उद्देश्य से विकसित किया गया कि जरूरतमंद बच्चों की पहचान, उन्हें सहायता से जोड़ने तथा सहायता के बाद उनकी प्रगति पर नजर रखने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जा सके।
महिला एवं बाल विकास विभाग की सत्यापित प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से सहायता की जरूरत वाले बच्चों तक सहयोग पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाता है।
तकनीक और संवेदना का संगम
‘भावनी’ पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें तकनीक को सामाजिक संवेदना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ा गया है। विभाग अपनी योजनाओं और सेवाओं के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ निरंतर कार्य करता है, वहीं समाज के सक्षम व्यक्ति और संस्थाएं जरूरतमंद बच्चों के लिए अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध करा सकते हैं।
