हास्य के रंगों में जीवन और रिश्तों की उलझनों की कहानियां का मंचीय प्रदर्शन

भोपाल :

बहुकला केंद्र भारत भवन में आयोजित चतुर्थ अखिल भारतीय सिंधी नाट्य समारोह का रविवार को तीन हास्य नाटकों की प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ। भारत भवन और सिंधी साहित्य अकादमी के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय समारोह वरिष्ठ रंगकर्मी सुंदर अगनानी की स्मृति को समर्पित था। अंतिम दिन मंच पर हास्य के साथ रिश्तों की पेचीदगियां, जीवन की विडंबनाएं, महत्वाकांक्षा और प्रेम के अलग-अलग रंग उभरकर सामने आए। सिंधी भाषा के सहज संवाद, चुटीले प्रसंग और कलाकारों के स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों को कभी ठहाके लगाने तो कभी जीवन की सच्चाइयों पर सोचने के लिए विवश किया। इससे पूर्व दिल्ली के वरिष्ठ रंगकर्मी शंकर मूलवानी को ‘सुंदर अगनानी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।

सामाजिक मानसिकता पर भी व्यंग्य
समारोह की पहली प्रस्तुति शंकर मूलवानी के निर्देशन में ‘शादी शर्त सां’ रही। नाटक की कथा एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसमें पति-पत्नी, उनकी वयस्क बेटी और घर में काम करने वाला घरेलू नौकर है। बेटी एक युवक से प्रेम करती है और दोनों विवाह का निर्णय लेते हैं, लेकिन युवक विवाह के लिए एक शर्त रख देता है। लड़की इस अनजान शर्त को लेकर नाराज होती है और विवाह से इनकार कर देती है। माता-पिता हालांकि पहले शर्त सुन लेने की सलाह देते हैं। जब लड़के के माता-पिता घर पहुंचकर विवाह में दहेज के रूप में घरेलू नौकर को मांगते हैं तो कहानी अप्रत्याशित हास्य में बदल जाती है। असामान्य मांग से उपजी परिस्थितियां, तीखे संवाद और हास्यपूर्ण पंच दर्शकों को लगातार गुदगुदाते रहे। नाटक ने हास्य के माध्यम से दहेज जैसी सामाजिक मानसिकता पर भी व्यंग्य किया।

शॉर्टकट विनाश की ओर ले गया
अशोक बुलानी के निर्देशन में ‘जिंदगी जा रंग’ ने हास्य के बीच गंभीर सामाजिक संदेश रखा। नाटक योग्यता और मेहनत के बल पर सफलता हासिल करने तथा बच्चों पर विश्वास करने के साथ अंधविश्वास से बचने का संदेश देता है। कथा 2016 में बैरागढ़ में हुई एक घटना से प्रेरित है। बैंक मैनेजर महेश का बेटा राजू क्रिकेट का दीवाना है और आईपीएल में खेलने का सपना देखता है। जल्दी सफलता पाने की चाह उसे शॉर्टकट की ओर ले जाती है। दोस्तों के साथ पार्टी के दौरान वह बुकी के संपर्क में आता है और क्रिकेट सट्टेबाजी में फंस जाता है। पांच हजार रुपये से शुरू हुआ लालच बढ़ते-बढ़ते उसे नशे और शेयर बाजार में पैसे लगाने तक ले जाता है। उस पर करीब 32 लाख रुपये का कर्ज हो जाता है। बुकी के तकादे से बचने के लिए वह पिता के एक्सीडेंट की झूठी कहानी गढ़कर लोगों से उधार लेता है, लेकिन बात परिवार तक पहुंच जाती है। बहनों रिया और प्रिया की पहल पर पुलिस बुकी को गिरफ्तार करती है। अंततः राजू को समझ आता है कि जल्दी पैसा कमाने की चाह में अपनाया गया शॉर्टकट उसे विनाश की ओर ले गया।

भावनाओं की अभिव्यक्ति, रिश्तों की उलझन
अंतिम प्रस्तुति जूली तेजवानी के निर्देशन में ‘आई लव यू’ रही। प्रेम को केंद्र में रखे इस नाटक में भावनाओं की अभिव्यक्ति, रिश्तों की उलझन और प्रेम के इर्द-गिर्द पैदा होने वाली हास्यपूर्ण परिस्थितियों को सहजता से मंच पर उतारा गया। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने आधुनिक जीवन में प्रेम की बदलती भाषा और रिश्तों की नाजुकता को मनोरंजक अंदाज में सामने रखा। ठहाकों और तालियों से गूंजते सभागार के बीच समारोह का समापन हुआ और सिंधी रंगमंच की जीवंत परंपरा ने अपनी सांस्कृतिक चमक एक बार फिर दर्शकों के सामने बिखेर दी।