चंदेरी, कोटा और कांजीवरम की बुनाई, बारीकी और हुनर ने किया आकर्षित

भोपाल। मध्य प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम की ओर से गौहर महल में आयोजित स्टेट हैंडलूम एक्सपो इन दिनों कला एवं हथकरघा प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 11 अक्टूबर तक चलने वाले इस एक्सपो में देश के 16 राज्यों से आए शिल्पी और बुनकर अपने पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं। अलग-अलग राज्यों की बुनाई, डिजाइन, रंग संयोजन और पारंपरिक तकनीकें यहां आने वाले लोगों को आकर्षित कर रही हैं।एक्सपो में राजस्थान का प्रसिद्ध कोटा, तेलंगाना का कॉटन, मैसूर का सिल्क और मध्यप्रदेश की चंदेरी प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। चंदेरी की महीन बुनाई और हल्के कपड़े के साथ पारंपरिक डिजाइन लोगों को पसंद आ रहे हैं। वहीं कोटा और दक्षिण भारत के विभिन्न सिल्क उत्पादों में भी खरीदारों की रुचि देखी जा रही है।

65 हजार की कांजीवरम साड़ी
कर्नाटक से आए शशिधर ने बताया कि बेंगलुरु क्षेत्र की कांजीवरम साड़ी रियल जरी से तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि एक विशेष साड़ी में एक ही रंग और एक ही डिजाइन रखा गया है तथा इसे एक महिला के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसकी कीमत करीब 65 हजार रुपये है और इसकी रिसेल वैल्यू भी बनी रहती है।

सेमी टसर सिल्क की साड़ी पर पिचवाई आर्ट
तमिलनाडु के मदुरई से आए श्रवण ने यहां कोरा सिल्क की साड़ियों को प्रदर्शित किया है। उन्होंने बताया कि मदुरई की पारंपरिक बुनाई और सिल्क की विशेष बनावट इन उत्पादों की पहचान है। जम्मू-कश्मीर से आए इरफान हुसैन ने बताया कि उनके स्टॉल पर सेमी टसर सिल्क की साड़ी पर पिचवाई आर्ट का काम प्रदर्शित किया गया है। इसकी खासियत यह है कि इसे सामान्य तरीके से धोया जा सकता है। साड़ी को आंध्र प्रदेश के कारीगरों ने तैयार किया है, जिसमें वहां की लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को उकेरा गया है।