10 हजार पौधों से रखी सपनों की नींव, आज हर महीने तैयार कर रहे 15 लाख पौधे
भोपाल:
कभी दो हजार वर्गफीट में शुरू की गई छोटी-सी नर्सरी आज हर महीने लगभग 15 लाख पौधे तैयार कर रही है। पानी की कमी से जूझने वाले खेतों में अब आधुनिक पॉलीहाउस हैं और यहां तैयार पौध मध्यप्रदेश के साथ दूसरे राज्यों के किसानों तक पहुंच रही है। यह कहानी है भोपाल जिले के ग्राम रतुआ रतनपुर के किसान भाई हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह की, जिन्होंने मेहनत, प्रशिक्षण और नई तकनीक के सहारे खेती में उद्यम की संभावनाओं को साकार किया है।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने उनकी ‘ओम नर्सरी’ का अवलोकन कर पौध उत्पादन की जानकारी ली। उन्होंने किसान भाइयों के नवाचार, उद्यमशीलता और आधुनिक तकनीक अपनाकर व्यवसाय का विस्तार करने के प्रयासों की सराहना की।
पानी की चुनौती आई तो खुद विकसित किया जल स्रोत
वर्ष 2017-18 में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने से दोनों भाइयों को खेती को नई दिशा देने का अवसर मिला। विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने उन्नत कृषि तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और पौध उत्पादन की बारीकियां सीखीं। वर्ष 2018 में अपने खेत पर दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस नर्सरी स्थापित की और लगभग 10 हजार पौधों से काम शुरू किया।
शुरुआत आसान नहीं थी। पौधों को तैयार करने के लिए पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनी। दोनों भाइयों ने हिम्मत बनाए रखी और कुएं की खुदाई कर जल स्रोत विकसित किया। इसके बाद सिंचाई सुविधाओं का क्रमिक विस्तार किया। आज उनकी आठ एकड़ भूमि पूरी तरह सिंचित है।
छोटी शुरुआत को आधुनिक तकनीक से मिला विस्तार
प्रशिक्षण से मिली जानकारी को दोनों भाइयों ने अपने काम में उतारा और उत्पादन बढ़ाते गए। वर्ष 2024 में लगभग 45 लाख रुपये के ऋण से नर्सरी के विस्तार को गति मिली। वर्तमान में लगभग दो एकड़ क्षेत्र में संचालित नर्सरी में कुल चार हजार वर्गमीटर क्षेत्र में दो पॉलीहाउस स्थापित हैं।
यहां गुलाब, जरबेरा और गेंदा सहित विभिन्न फूलों की पौध के साथ बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरे जैसी सब्जियों के हाइब्रिड पौधे तैयार किए जाते हैं। लगभग 10 हजार पौधों से शुरू हुआ यह उद्यम अब प्रतिमाह करीब 15 लाख पौधों के उत्पादन तक पहुंच गया है।
गांव में रोजगार, दूसरे राज्यों तक कारोबार
नर्सरी के विस्तार का लाभ आसपास के ग्रामीण परिवारों को भी मिला है। यहां 15 से 20 लोगों को रोजगार मिल रहा है। दोनों भाइयों की मेहनत से विकसित यह उद्यम अब मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसानों तक पौध पहुंचा रहा है।
कारोबार बढ़ाने में डिजिटल माध्यमों की भी भूमिका रही है। सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए किसान उनसे संपर्क कर पौध मंगाते हैं। इस तरह गांव में स्थापित नर्सरी को व्यापक बाजार से जुड़ने का अवसर मिला है।
प्रशिक्षण और योजनाओं के सहयोग से मिली नई दिशा
हेमंत कुशवाह बताते हैं कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रशिक्षण, शासकीय योजनाओं के सहयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित किसान हितैषी योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
रतुआ रतनपुर के इन किसान भाइयों ने छोटे स्तर पर शुरुआत की, कठिनाइयों का समाधान खोजा और सीखने का सिलसिला जारी रखा। आज उनकी नर्सरी में तैयार होता हर पौधा खेती से उद्यम और उद्यम से रोजगार तक बढ़ते इसी सफर की पहचान है।

