2027 दीपों की रोशनी से जगमगाया गौहर महल का दीवान-ए-खास, दीपोत्सव ने रचा अनुपम दृश्य
भोपाल :
ऐतिहासिक गौहर महल मंगलवार की शाम दीपों की स्वर्णिम आभा से आलोकित हो उठा। मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम की ओर से आयोजित दीपोत्सव मेले में शाम ठीक 6:15 बजे 2027 दीप प्रज्ज्वलित किए गए। एक साथ प्रज्ज्वलित हुए दीपों की सुनहरी रोशनी ने महल के दीवान-ए-खास को ऐसा अलौकिक स्वरूप प्रदान किया कि पूरा परिसर प्रकाश, उल्लास और सांस्कृतिक आभा से सराबोर हो गया। यह आयोजन वर्ष 2026 की विदाई बेला और नववर्ष 2027 के स्वागत की भावनाओं को समर्पित रहा।
दीपों की कतारों ने ऐतिहासिक स्थापत्य की खूबसूरती में नई चमक भर दी। महल की प्राचीन दीवारों, मेहराबों और पारंपरिक वास्तुशिल्प के बीच जलते दीपों का दृश्य भारतीय संस्कृति की उस सनातन परंपरा का स्मरण करा रहा था, जिसमें दीप केवल रोशनी का माध्यम नहीं, बल्कि आशा, सकारात्मकता, ज्ञान और मंगलकामना के प्रतीक माने जाते हैं। इसके साथ ही विशेष रूप में विकसित मध्यप्रदेश की थीम पर दीये सजाये गए। इस अवसर पर उमेश श्रीवास्तव, उप संचालक हथकरघा, लेखपाल रमेश शाक्य, मिलिंद मेंडी सहायक प्रबंधक, प्रबंधक रंजना निनावे, आलोक भावसार, सुरेंद्र वर्मा, रमाकांत अग्रवाल। रंगोली कार्यकर्ता सुमन कोल सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए।
दीपों की लौ में झलकी परंपरा और संस्कृति
दीवान-ए-खास में सजे दीपों की श्रृंखला ने अतीत और वर्तमान के बीच एक सुंदर सांस्कृतिक सेतु निर्मित किया। मिट्टी के दीपों से निकलती लौ ने स्वदेशी शिल्प और स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता को भी विशेष अभिव्यक्ति दी। दीपोत्सव मेले का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प, माटीकला और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ भारतीय उत्सव परंपराओं को जीवंत बनाए रखना है। इस आयोजन में 2027 दीपों का प्रज्ज्वलन केवल एक प्रतीकात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि आने वाले वर्ष के लिए नई उम्मीदों, नई ऊर्जा और मंगलमय भविष्य की सामूहिक कामना का प्रतीक बना। ऐतिहासिक गौहर महल में साकार हुआ यह दीपोत्सवी दृश्य शहर की सांस्कृतिक स्मृतियों में एक सुंदर अध्याय जोड़ गया। 2026 को विदाई देते दीपों की लौ ने मानो संदेश दिया कि समय बदलता है, वर्ष गुजरते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति की परंपराओं का प्रकाश सदैव अक्षुण्ण रहता है।

