भोपाल

आज के समय में पुरुषों पर महिलाओं और पत्नियों द्वारा प्रताड़ना के झूठे केस दर्ज कराए जा रहे हैं,जिनकी सहायता के लिए वॉच लीग की चन्दना छाबड़ा ने कहा कि हमने कई ऐसे मामलों में सरकार और कानून को अवगत कराया था जिसके लिए हम न्यायपालिका का धन्यवाद करना है, जिन्होंने वैवाहिक आतंकवाद से संबंधित मामलों में कई संतुलित निर्णय दिए हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई फ़र्ज़ी मामले खारिज किए गए हैं और निर्दोष पति-पक्ष को राहत दी गई है।
विशेषकर भोपाल के फॅमिली-कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों जिनमें की माननीय न्यायाधीश अनुदिता गुप्ता, माननीय न्यायाधीश शोभना गौतम, माननीय न्यायाधीश समीर कुलश्रेष्ठ, माननीय न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल, व् इंदौर के माननीय न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर जी का हम वाच-लीग की ओर से हृदय से धन्यवाद् करते है।
इसके साथ ही वॉच-लीग का माननीय न्यायालयों से निवेदन है की वैवाहिक-आतंकवाद के सभी प्रकरणों में निर्दोष पति-पक्ष के विरुद्ध दर्ज फ़र्ज़ी मामलों में रहत प्रदान करें : हम माननीय न्यायाधीशों से अनुरोध करते हैं कि वे फर्जी मामलों की पहचान के लिए स्पष्ट मापदंड स्थापित करें और सुनिश्चित करें कि इन्हे प्रभावी ढंग से ख़ारिज किया जाये, ताकि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे, साथ ही निर्दोष व्यक्तियों को उत्पीड़न ना हो।
इन प्रकरणों में यह भी देखा गया है कि कुछ वकील पैसों के लालच में, महिलाओं के कहने पर निर्दोष पति के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराते हैं। वे महिलाओं को आपराधिक प्रकरण कायम करने का एक ‘पैकेज’ ऑफर करते हैं, जिसमें घरेलू हिंसा अधिनियम, दहेज अधिनियम और अन्य संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत आरोप शामिल होते हैं। यदि वकील झूठे मामले दर्ज कराते है तो उनके विरद्ध आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है,जिसमें सजा और वकालत की व्यवसायिक मान्यता से संबंधित दंड शामिल हैं। वकीलों के विरुद्ध बार कौंसिल भी उचित कानूनी कार्रवाई कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाया है, जहाँ झूठे आरोपों के माध्यम से वैवाहिक संबंधों को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को निंदनीय बताया गया है।
बच्चो की कस्टडी के मामले

में उन्होंने कहा कि कई परिस्थितियों में पति-पिता पक्ष के विरुद्ध किडनेपिंग के मामले तक दर्ज कर दिए जाते हैं । माननीय न्यायाधीश महोदय, जो इस समय अत्यधिक कार्य से जूझ रहे हैं, उनसे हमारी विनती है की ऐसे मामलों को भी जब फ़र्ज़ी पाया जाये तो पति-पक्ष को राहत के साथ ही फ़र्ज़ी मामला दर्ज करने वालों के विरुद्ध भी कठोर निर्णय सुनाए। क्योंकि भारतीय दंड संहिता के अनुसार, न्यायालयों में झूठा साक्ष्य देना और फर्जी साक्ष्य तैयार करना गंभीर अपराध हैं।