आरडीएसएस के प्रथम चरण में आवंटित 3211 करोड़ की राशि से नवीन कार्यों को पूर्ण कराने की गति हुई तेज

भोपाल 26 सितंबर। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आर.डी.एस.एस. योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों को गति दी जा रही है। इसके लिए प्रथम चरण में 3211 करोड़ रूपए की स्‍वीकृति होने उपरांत लगभग पचास प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 42 प्रतिशत वित्‍तीय प्रगति पूर्ण हो चुकी है। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा कंपनी के लिए आर.डी.एस.एस. योजना अंतर्गत लॉस रिडक्शन चरण-1 में मार्च-2022 में राशि रू. 3211/- करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। 2. योजना का उद्देश्य कंपनी की परिचालन क्षमता व वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना एवं कंपनी स्तर पर एटी एंड सी लॉस को लगभग 19 प्रतिशत तक लाना है, साथ ही एसीएस-एआरआर गैप को (-)0.10 रूपए तक सीमित करना है। कंपनी ने बताया कि वर्तमान में आर.डी.एस.एस योजनांतर्गत स्वीकृत कार्यों की भौतिक प्रगति 51 प्रतिशत है तथ वित्तीय प्रगति 42 प्रतिशत है। अद्यतन स्थिति को देखें तो 526 केपेसिटर बैंक तैयार होने हैं, जिनमें से 513 तैयार हो चुके हैं। इसी तरह 83 नवीन 33/11 के.व्ही. सबस्टेशन तैयार होने हैं, जिनमें से 69 तैयार हो चुके हैं। 111 अतिरिक्त पीटीआर एवं पीटीआर की क्षमता वृद्धि 100 फीसदी हो चुकी है। 13180 किलो मीटर 33 के.व्‍ही. एवं 11 के.व्ही. लाइन बननी थी, जिसमें से 9108 किलो मीटर लाइन तैयार हो चुकी है। 303 फीडर विभक्तिकरण में से 87 पूरे हो गए हैं। कंपनी कार्यक्षेत्र में कुल 5781 अतिरिक्त वितरण ट्रांसफार्मर लगने हैं उनमें से 4167 लग चुके हैं। 181 कि.मी. एल. टी. भूमिगत केबल में से 126 कि.मी. एल. टी. भूमिगत केबल बिछाई जा चुकी है। इसी तरह से 9347 कि.मी. एल.टी. लाईन में से 6828 कि.मी. एल.टी. लाईन तैयार हो चुकी है एवं शेष कार्य लगातार प्रगति पर हैं।
कंपनी ने बताया कि आरडीएसएस योजना में उच्च गुणवत्ता एवं पारदर्शितापूर्ण कार्यों के त्वरित क्रियान्वयन हेतु विभिन्न आईटी एप्लीकेशन का उपयोग किया जा रहा है जिनमें GIS Portal & Mobile App के जरिए प्रस्तावित कार्यों का जियो टेगिंग सर्वे कर जीआईएस प्राक्कलन तैयार किया जाता है। Quality Control Portal के माध्‍यम से सामग्री का क्रय एवं गुणवत्ता, क्रियान्वयन की गुणवत्ता, कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र, परिचालन स्वीकृति एवं देयकों का भुगतान किया जाता है। वहीं e-Measurement Mobile App से पूर्ण कार्यों का मापन (जियो टेगिंग एवं फोटो सहित) किया जाता है। कंपनी के ERP Portal पर प्राक्कलन स्वीकृति एवं एसेट केपेटेलाईजेशन का कार्य किया जा रहा है।