कृषि के क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे हैं नये कीर्तिमान

भोपाल:

प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। उत्पादन में रिकार्ड दर्ज कर प्रदेश को 7 बार लगातार कृषि कर्मण अवार्ड मिले हैं। म.प्र. दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान पर, खाद्यान उत्पादन में द्वितीय स्थान पर एवं तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। तृतीय फसली क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।

प्रदेश में नरवाई जलाने की घटनाओं में कमी (हतोत्साहित) करने के लिए प्रदेश में प्रभावी कार्यवाही की गई है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में कृषि विभाग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत अनेकों कार्यक्रम लिये जा रहे है, जिससे प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा रबी 2024-25 में उपार्जित गेहूँ पर राशि रूपये 175 प्रति क्विटंल प्रोत्साहन राशि प्रदाय गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में किसान सम्मान निधि के अंतर्गत लगभग 83.50 लाख से अधिक किसानों को लगभग राशि रूपये 1770 करोड़ उनके खाते में सिंगल क्लिक के माध्यम से जमा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 81 लाख से अधिक किसानों को राशि रूपये 1624 करोड़ उनके बैंक खाते में सिंगल क्लिक के माध्यम से जमा की गई है।

प्रदेश में पहली बार भारत सरकार की प्राईस सर्पोट स्कीम अंतर्गत सोयाबीन का उपार्जन किया गया, जिसमें 2,12,568 कृषकों से कुल 6.22 लाख मे.टन मात्रा का उपार्जन किया गया, जिसके न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि 3043.04 करोड़ है। श्रीअन्न के उत्पादन को बढावा देने के लिए रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना लागू की है, जिसके तहत किसानों को राशि रूपये 3900/- प्रति हैक्टेयर डी.बी.टी. के माध्यम से उनके बैंक खाते में देय होगा।

किसान भाईयों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ ही फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, स्वाईल हेल्थ कार्ड और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि का लाभ भी मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल के नुकसान का समय पर आंकलन एवं राहत राशि का वितरण किसानों को समय पर मध्यप्रदेश में मिल रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन और दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एनसीआईपी पोर्टल के साथ अपने भूमि रिकॉर्ड को सफलता पूर्वक एकीकृत करने एवं इस पोर्टल को ओर अधिक किसान अनुकूल बनाने के लिए ‘उत्कृष्टता प्रमाण पत्र’ प्रदान किया गया है। आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने हेतु शासन द्वारा नमो ड्रोन दीदी योजनांतर्गत मध्य प्रदेश में अभी तक 89 दीदीओं को स्वाबलंबन बनाया गया है, इनके माध्यम से 4200 हेक्टेयर में तरल उरर्वरक का छिड़काव तथा राशि रूपये 21.22 लाख का शुद्ध आय प्राप्त की। इस वर्ष 2025 -26 में 1066 दीदीओं को इसका लाभ दिया जा रहा है।

कृषकों द्वारा फसल अवशेष (पराली) जलाने से रोकने हेतु शासन द्वारा कई कदम उठाये गये है, जिसमें प्रदेश स्तर पर 46,800 से अधिक नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र अनुदान पर वितरित करते हुए कुल राशि रु 412.00 करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई है। कौशल विकास केन्द्रों के माध्यम से किसान ड्रोन पायलट प्रशिक्षण एवं ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान कराया जा रहा है। प्रशिक्षण में 50 प्रतिशत शुल्क का भुगतान म.प्र. शासन द्वारा वहन किया जा रहा है। तक 412 युवाओं को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण तथा 33 प्रशिक्षणार्थियों को ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कृषकों को सस्ते दर पर यंत्र उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण युवाओं को स्वावलंबी बनाये जाने हेतु शासन के जन संकल्प पत्र 2023 के अनुपालन में हर वर्ष 1000 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित किये जा रहे है। पूरे देश में इस योजना की पहल मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2012 में की गई तथा अब तक 4730 कस्टम हायरिंग केन्द्र प्रदेश स्तर पर स्थापित होकर कृषकों को लाभ दे रहे है। आवेदक को प्रोजेक्ट की लागत अधिकतम राशि 25 लाख रूपये तक के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत अधिकतम राशि 10 लाख रूपये का अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में APEDA अन्तर्गत 11.48 लाख हेक्टयर फसल उत्पादन क्षेत्र एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्र सहित कुल 20.55 लाख हेक्टयर जैविक क्षेत्र पंजीकृत है। “एक जिला एक उत्पाद” अंतर्गत कृषि संबंधी 06 उत्पाद कोदो-कुटकी-अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिंगरौली, तुअर दाल- नरसिंहपुर, चना-दमोह, बासमति चावल-रायसेन, चिन्नोर चावल-बालाघाट, सरसों-भिण्ड एवं मुरैना, अंतर्गत 10 जिले शामिल किये गये है।

फार्म गेट एप के तहत किसान अपनी उपज का विवरण, फोटो मोबाइल एप्लिकेशन पर डाल कर मंडी मे पंजीकृत व्यापारियों के साथ मोल भाव कर सकता है। सौदा तय होने पर किसान की सहमति प्राप्त कर व्यापारी सीधे किसान के गाँव / खेत से उपज उठा लेता है। इससे भौतिक रूप से माल के परिवहन की आवश्यकता नहीं रहती। माल न बिकने, की अनिश्चितता को समाप्त करता है। मंडी मे सही दाम न मिलने पर भी, विशेषकर छोटे और माध्यम किसान जिनके पास अपने परिवहन के साधन नहीं होते, को मजबूरी मे उपज नहीं बेचना पड़ती है। भाड़े की बचत होती है। मंडी के माध्यम से किसान को मंडी अनुबंधित व्यापारी का चयन कर खेत/गोदाम पर ही फसल को बेचने की सुविधा है।

रानी दुर्गावती प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष में किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया।