लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मां कालिका देवी का मंदिर भव्य एवं विशाल मंदिर में विराजमान है मां कालिका देवी, यहां होती हर मनोकामना पूर्ण, मनोकामना पूर्ण होते ही श्रद्धालु दरबार में टेकते है मत्था..
भिंड। जिला मुख्यालय से 40 कीलों मीटर दूर स्थित सिंध नदी के किनारे बसे रौन क्षेत्र के बघेली बहादुर पुरा गांव में बने भव्य एवं विशाल मंदिर में वीराजमान है मां कालिका देवी। इस प्रसिद्द मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी – अपनी मनोकामना पूर्ण करने हेतु मां कालिका देवी जी की पूजा अर्चना के लिए आते है। यहां भिंड जिले के इलावा ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, इटावा, आगरा, कानपुर,, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि स्थानों श्रद्धालु आते रहते है। जब इन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है तो वो अपनी श्रद्धा अनुसार मां के दरबार में चढ़ौती भी चढ़ाते है। जिससे मां का दरबार ओर भी भव्य एवं विशाल रूप लेता जा रहा है। यहां मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर के सौंदरीकरण एवं मजबूती के लिए विशेष निगरानी में लगातार काम चलता रहता है। बाहर से आय हुए श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो इस लिए कमेटी द्वारा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के उचित ठहरने के विशेष प्रबंध किए गए है।
मंदिर के अंदर 14 बीघा पक्के जमीन में हो रहा सौंदरीकरण
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यहां आपको बता दे कि राजा इंद्र देव कच्छवाह ने सन 1115 ईस्वी में मां कालिका देवी की प्रतिष्ठा कराई थी। तब यह मंदिर का कुछ हिस्सा पक्का एवं अधिकांश भाग कच्चा था। उसके बाद ईस्वी 1933 में ग्वालियर मराठा राज्यंतर्गत भिंड सूबे हुआ करते थे जिन्हें कलेक्टर कहते है। इन सूबे कलेक्टर की कोई संतान नहीं थी। मंदिर की देख भाल संत पूरन दास जी महाराज व उनके शिष्य किया करते थे। तभी संत पूरन दास महाराज के शिष्य से कलेक्टर साहब की अचानक मुलाकात हुई तो शिष्य ने चर्चा में कहा कि हमारे यहां बघेली बहादुर पुरा गांव में मां कालिका देवी का मंदिर है। वहां आप दर्शन करने अवश्य आए तो आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। तभी कलेक्टर साहब मंदिर के दर्शन करने के लिए आए। फिर कुछ माह बाद कलेक्टर साहब के संतान हुई और उन्होंने खुश होकर मंदिर परिसर में कुआं एवं धर्मशाला का निर्माण कराया, जिसका प्रतीक चिन्ह आज भी मंदिर परिसर में स्थापित है।
साल में 5 बार लगता है मेला
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मां कालिका के दरबार में साल में 5 बार मेला लगता है। अघन, माह, वैशाख, चैत्र व क्वांर नवदुर्गा में यहां लाखों की भीड़ एकत्रित हो जाती है। ओर हर माह के चौथे शनिवार को भी मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। श्रद्धालु अपनी- अपनी मनोकामना पूर्ण होने से ही लगाव रखने लगते है। साथ ही मां कालिका से अधिक प्रेम भी करते है। यहां पारंपरिक तौर पर बेटा- बेटी होने पर श्रद्धालु पूजा करने भी आते है। इसके साथ ही परिवार में बेटे के विवाह उत्सव होने के बाद लड़का बहू को साथ लेकर यहां पूजा करने की परम्परा सदियों से है। इस क्षेत्र का व्यक्ति कहीं भी चला जाए, लेकिन उक्त उत्सवों के उपरांत मां कालिका देवी की पूजा करने बघेली बहादुरपुरा में अवश्य आता है। जिससे यहां लगभग सभी प्रदेशों एवं जिलों से लोग आते हैं ,और मां की पूजा अर्चना करते हैं। जिससे साल में 1 करोड़ रुपए से अधिक को चढ़ौती हो जाती है। यह रुपया मंदिर कमेटी ओर प्रशासनिक देख भाल में रहता है। श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो तो मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर परिसर के अंदर निशुल्क पार्किंग सेवा भी संचालित है। यहां श्रद्धालुओं को रुकने के लिए धर्मशाला भी निशुल्क उपलब्ध है। ग्रामीणों को रोजगार हेतु यहां प्रसार में 23 दुकान भी संचालित है। जिससे प्रति दुकानदार हर माह 300 रु. किराया देता है।
बुद्धिजीवी वर्ग के लोग कर रहे पुलिस चौकी और बायपास सड़क की मांग
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हर माह शनिवार के दिन लगने वाले मेले में आने जाने वाले श्रद्धालुओं को यातायात में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव की सकरी गलियों में श्रद्धालु घंटों जाम में फंसे रहते है। स्थिति यह हो जा जाती है कि पुलिस को सूचना देने के बाद भी स्वयं पुलिस को कई घंटों जाम खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां दो कार्य अत्यंत महत्पूर्ण है। जिसमें पहला कार्य मुख्य सड़क के लिए कालिका मंदिर से बीछोली होते हुए महदा से सड़क मार्ग को पक्की सड़क बनना, और दूसरा रास्ता है कालिका मंदिर से हनुमान जी का मंदिर होते हुए तोमर का कुआं से बिसेने के पुरा की मुख्य सड़क मार्ग से जुड़ता है ये रास्ता मुख्य मार्ग से जोड़ा जाय। स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि दूसरा कार्य मंदिर परिसर के आसपास पुलिस चौकी का होना अति आवश्यक है। जिससे परिसर में दारू की बिक्री बंद हो जायेगी, इसके साथ ही असामाजिक तत्वों में भय रहने लगेगा, जिससे अपराध पर अंकुश लगेगा। और आने वाले श्रद्धालुओं में भय का वातावरण भी समाप्त हो जायेगा।______
मैंने पुलिस चौकी को लेकर सांसद संध्या राय जी से उनके दिल्ली निवास पर मुलाकात की थी, तो उन्होंने हमारी बात दिनांक 04 – 12- 022 को पत्र के माध्यम से तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा जी को भिजवा दिया था। जिसकी आज दिनांक तक कोई सुनवाई नहीं हुई।________
मां कालिका देवी का मंदिर चम्बल अंचल का सबसे प्रतिष्ठित मंदिर है। यहां मेला लगने के उपरांत श्रद्धालु घंटों सड़क जाम में फसे रहते है जिससे उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। में शासन प्रशासन से यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए बायपास सड़क की मांग करता हूँ।________
मां कालिका के दरबार मे बहुत बड़ा मेला लगता है। सड़क पर जाम लगने से कई घंटे श्रद्धालुओं को मुसीबत का सामना करना पड़ता है। अगर नई सड़क मंदिर से हनुमान जी का मंदिर होते हुए तोमर का कुआं के पास से सीधे परसाला मोड के लिए जुड़ जाए तो बहुत सही रहेगा। हम सभी इस नए सड़क मार्ग की मांग करते है।
