स्कूल शिक्षा विभाग और विद्यार्थियों की आंखों में धूल झोंक रहे प्राइवेट स्कूल संचालक… सवाल- मान्यता प्राप्त कक्षाओं से बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों को कैसे पढ़ाया जा रहा
भोपाल। विद्यार्थियों की गणवेश और किताबों पर मनमाना कमीशन बनाने वाले निजी स्कूलों की एक और बड़ी मनमानी सामने आ रही है। स्कूल संचालकों की इस मनमानी को एक तरफ शिक्षा विभाग की लापरवाही और उदासीनता का खाद मिल रहा है वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को स्पष्ट धोखे की खरपतवार नसीब हो रही है। छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के साथ अन्य गतिविधियों के नाम पर मोटी फीस वसूलने वाले स्कूल संचालकों को न तो नैतिकता की चिंता है और न ही प्रशासन का ख़ौफ़। अकेले भोपाल में ही कई निजी स्कूल संचालकों द्वारा प्रतिवर्ष विद्यार्थियों के साथ छल किया जा रहा है, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों का स्पष्ट संरक्षण प्रथम दृष्टया देखने को मिल रहा है।
कई स्कूलों में पढ़ाई जा रही मान्यता से बड़ी कक्षाएं
राजधानी के शहरी क्षेत्र में ही कई निजी स्कूल ऐसे हैं जिनको शासन द्वारा महज 8वीं और 10वीं कक्षाओं तक की मान्यता दी गई है। नतीजतन नियमानुसार वे केवल उन्हीं कक्षाओं में विद्यार्थियों को प्रवेश पंजीयन दे सकते हैं जितनी उनकी मान्यता है, लेकिन राजधानी में ही उल्टी गंगा बहाते हुए निजी स्कूल संचालकों द्वारा प्राप्त मान्यता से बड़ी कक्षाओं के बच्चों को प्रवेश पंजीयन दिया गया है। नियमों को ठेंगा दिखाते हुए महज 8वीं और 10वीं की मान्यता रखने वाले स्कूलों में भी 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है, जिस पर जिम्मेदार अधिकारी बात करने से कतरा रहे हैं।
परिजनों को सता रही विद्यार्थियों के भविष्य की चिंता
मान्यता से बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों को अपने स्कूल में एडमिशन देने वाले स्कूल संचालक बोर्ड परीक्षा के फॉर्म मान्यता प्राप्त स्कूलों के नाम से भरवाते है। मिली जानकारी के मुताबिक विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान उत्तर पुस्तिका में भी उसकी स्कूल का विवरण भरने को कहा जाता है जिस स्कूल का विद्यार्थी उसे परीक्षा फॉर्म में दिखाया गया है। सूत्र बता रहे हैं कि ये पूरा खेल न सिर्फ दो स्कूलों बल्कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से चलता है। विद्यार्थियों और खुद की पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने दैनिक एक सत बुलेटिन से इस मामले को उजागर करने की मांग की है। अभिभावकों समेत विद्यार्थियों के मन में भविष्य की चिंता बैठ गई है, उनका कहना है कि ऐसे कई स्कूल हैं जिनमें बड़ी कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या सीमित होती है जिसके कारण उन्हें भी वही शिक्षक पढ़ाते हैं जो उन विषयों पर पकड़ नहीं रखते।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार अहिरवार से इस मामले में जब बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायतकर्ता अपनी शिकायत दर्ज कराएगा तो निश्चित रूप से कार्यवाही की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने ऐसे मामलों को स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी बताया और कहा कि प्रकरण सामने आते ही दोषी स्कूल संचालकों पर न सिर्फ जुर्माना लगाया जा सकता है बल्कि मान्यता समाप्ति की अनुशंसा की कार्यवाही भी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूल संचालकों को अभियान चलाकर चिन्हित किया जाएगा।

