शांति और विकास की राह पर लौटे नक्सली

भोपाल : 

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 10 हार्डकोर नक्सलियों का हथियारों सहित ऐतिहासिक आत्मसमर्पण
नक्सलियों पर विभिन्न राज्यों में कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये का इनाम घोषित था

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा शासन स्तर से निरंतर प्राप्त त्वरित सहयोग, सटीक इंटेलिजेंस, रणनीतिक सर्चिंग एवं लगातार जारी नक्सल विरोधी अभियानों और स्थानीय समुदाय के बढ़ते विश्वास के परिणामस्वरूप नक्सली गतिविधियाँ लगातार सिमट रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश को नक्सलवाद-मुक्त बनाने का लक्ष्य तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक ने इस उपलब्धि को हॉक फोर्स, जिला पुलिस, CRPF, कोबरा और स्थानीय प्रशासन के सुव्यवस्थित संयुक्त अभियानों का परिणाम बताया, जिसने मंडला–बालाघाट के सीमावर्ती क्षेत्र और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इलाकों को लगभग सशस्त्र नक्सली गतिविधियों से मुक्त कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि विगत 1 नवंबर 2025 को भी महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एम.एम.सी.) जोन की एक हार्डकोर सशस्त्र महिला नक्सली—सुनीता पिता बिसरू ओयाम, निवासी गोमवेटा (छत्तीसगढ़)—ने शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति पर विश्वास जताते हुए बालाघाट जिले में इंसास राइफल तथा हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। वह मलाजखंड–दर्रेकसा दलम में एसीएम थी और मध्यप्रदेश, गोंदिया एवं राजनांदगांव डिविजन में सक्रिय थी। सुनीता पर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में कुल 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह मध्यप्रदेश आत्मसमर्पण, पुनर्वास सह राहत नीति-2023 के अंतर्गत पहला ऐसा आत्मसमर्पण था। इस प्रकरण ने प्रदेश में नक्सली ढांचे के कमजोर होने के संकेत पहले ही स्पष्ट कर दिए थे।

हाल के महीनों में मध्यप्रदेश में सुरक्षा बलों का दबाव लगातार प्रभावी रहा है। महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन के प्रवक्ता अनंत उर्फ विकास नगपुरे पहले ही अपने दस सशस्त्र साथियों के साथ समर्पण कर चुके हैं, जिससे इस क्षेत्र में नक्सलियों का आधार और भी कमजोर हुआ है।

वर्ष 2025 में अब तक बालाघाट जोन में सुरक्षा बलों ने सर्वाधिक दस हार्डकोर नक्सलियों को मुठभेड़ों में ढेर किया है, जिन पर रुपए 1 करोड़ 86 लाख का इनाम घोषित* था। प्रदेश पुलिस के बढ़ते दबाव के परिणामस्वरूप हाल ही में MMC जोन के लगभग 17 नक्सली सीमावर्ती राज्यों महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 46 एकल सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से 2,046 वनाधिकार पट्टा दावे अग्रेषित किए गए, 1,232 जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा 748 आधार कार्ड अपडेट/वितरित किए गए। रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को निजी कंपनियों में चयनित कर सिंगल क्लिक से नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर तेज़ी से बढ़े हैं।