वैश्विक समस्याओं का समाधान भी हमारे शास्त्र देते हैं : वेदतत्वानंद महाराज
भोपाल:
शंकराचार्य जयंती के अवसर पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद जिला भोपाल द्वारा गुरुवार को शंकराचार्य जयंती के उपलक्ष में व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी वेदतत्वानंद पुरी महाराज आचार्य शंकर न्यास की गरिमा में उपस्थिति रही ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राजयोगी ने नीता दीदी ब्रह्मकुमारी संस्था तथा गायत्री शक्तिपीठ से रमेश नागर जी जिला समन्वयक की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ शंकराचार्य जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बकुल लाड ने कहा कि मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा पूरे प्रदेश में विकासखंड एवं जिला स्तर पर किया जा रहा है इन आयोजनों का उद्देश्य शंकराचार्य जी की शिक्षाओं से जनमानस को तथा जन अभियान परिषद से जुड़े हुए स्वैच्छिक संगठनों एवं छात्रों को अवगत कराना है। परिषद सभी जिलों एवं विकासखंडों में शंकराचार्य जयंती के उपलक्ष में व्याख्यान कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।आपने प्रतिभागियों को यह जानकारी दी कि शंकराचार्य जी द्वारा ही यंत्र का आविष्कार हुआ। अल्प आयु में शंकराचार्य जी ने पूरे देश को जोड़ा। आज इस दिन यह हम संकल्प लें कि हम सबको मिलकर समाज के शुद्धि करण का कार्य करना है। इसी के देश का विकास होगा।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में गायत्री शक्तिपीठ के जिला समन्वयक रमेश नागर द्वारा विश्व कल्याण की भावना के साथ सभी के मध्य गायत्री मंत्र का जप करवाया गया आपने अपने उद्बोधन के माध्यम से शंकराचार्य जी के जीवन पर प्रकाश डाला।
ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी नीता दीदी ने कहा कि शंकराचार्य जी ने हमें एकात्म की शिक्षा दी तथा सभी को धर्म से जोड़ा सभी प्रकार के भेद मिटाए। अपने उद्बोधन में आपने कहा कि ध्यान से आत्म शांति मिलेगी सभी को ध्यान का अभ्यास कराया गया, ध्यान के द्वारा आत्मा से परमात्मा का मिलन हो सकता है। ये शरीर एक साधन है और आत्मा साधक है। जब मेरी सोच में आ जाता है कि मैं कौन हु तो चारों ओर शांति के वाइब्रेशन शुरू हो जाते है तब सभी को उस गायन शांति का अनुभव होता है । आज जरूरत है शांति की जहां शांति है वहीं प्रेम आनंद की अनुभूति होती है।
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित स्वामी तत्त्वेदानंद पुरी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन वही है जो सदैव से है और सदैव रहेगा, हमारे आचरण उसी अनुरूप होंगे तो हम सनातन धर्म का पालन करेंगे। भगवान आवश्यकता होने पर अवतरित होने है।जब धर्म की हानि होती है तो भगवान अवतरित होते है, शंकराचार्य जब आए तब भारत का धर्म टूटा हुआ था , तब उन्होंने पूरे देश का भ्रमण कर मठों की स्थापना की तथा 16 वर्ष में अध्ययन पूर्ण कर सभी उपनिषदों एवं वेदों के भाष्य लिखे और यदि हम सभी वेदों का सार जानना चाहते हैं तो हमें व्यास रचित ब्रह्म सूत्र का अध्ययन करना होगा, ब्रह्मसूत्र में सभी प्रश्नों का हल मिल जाता है। महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन मोह में आया वह युद्ध नहीं करना चाहता था तब भगवान ने अर्जुन को उपदेश दे कर गीता के माध्यम से उसे युद्ध हेतु तैयार किया,आज सेना में गीता को अनिवार्य होना चाहिए। शंकराचार्य जी ने उसे समय प्रचलित सभी विचारधाराओं को अपने ज्ञान एवं युक्ति से सनातन से पुनः जोड़ दिया। हम यह कह सकते हैं कि उस समय विश्व में अकेले एक व्यक्ति द्वारा हजारों लोगों की घर वापसी का कार्य किया गया। अपने 32 वर्ष की अल्प आयु में ही युक्ति से सभी को एक सूत्र में बांध दिया । आज विश्व के समक्ष अनेक समस्याएं हैं परंतु उन समस्याओं का हल निकालने के लिए हमको शास्त्र लेकर उठाना होगा। विश्व में होने वाले सभी विवाद विचारधाराओं का ही टकराव है, हम सनातन धर्म का मानने वाले हैं, सनातन का अर्थ अपने से ही सदा रहना जो कभी खत्म नहीं हो। इस प्रकार हम सबके प्रयासों से पुनः शंकराचार्य जी के विचारों का प्रवाह होना चाहिए।
कार्यक्रम में संभाग समन्वयक अमिताभ श्रीवास्तव, सलाहकार गिरीश पुरी, जिला समन्वयक कोकिला चतुर्वेदी, विकासखंड समन्वयक टीना शर्मा तथा बड़ी संख्या में जन अभियान परिषद से जुड़े स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं वॉलिंटियर्स ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन अश्विनी, मंगलाचरण प्रतिभा चौहान तथा आभार प्रदर्शन नंदकिशोर मालवीय द्वारा किया गया।

