नाम लेते ही भड़का निगम सदन: ‘बाहरी दखल’ के आरोपों पर सियासी संग्राम, संजीव सूरी को लेकर तीखी टकराहट

कटनी:

नगर निगम की बैठक उस समय राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई, जब कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ पार्षद एडवोकेट मौसूफ बिट्टू ने निगम के कामकाज में कथित बाहरी हस्तक्षेप और भेदभाव का गंभीर मुद्दा उठा दिया। शुरुआत में इशारों में लगाए गए आरोपों ने जैसे ही नाम की शक्ल ली, पूरा सदन गरमा गया और माहौल तनावपूर्ण हो उठा।
बैठक के दौरान मौसूफ बिट्टू ने आरोप लगाया कि नगर निगम के निर्णयों और विकास कार्यों में कुछ खास लोगों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे निराधार और भ्रामक बताया। महापौर और मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस प्रमाण इस तरह के आरोप लगाना पूरी परिषद की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है।
विवाद तब और भड़क गया जब दबाव के बीच पार्षद बिट्टू ने संजीव सूरी का नाम ले लिया। नाम सामने आते ही सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और सत्ता पक्ष के पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। महापौर ने भी कड़े शब्दों में इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निगम की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की बात बेबुनियाद है।
इसके बाद सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। एक ओर जहां मौसूफ बिट्टू अपने आरोपों पर अडिग रहे, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष ने इसे महज राजनीतिक आरोप बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। काफी देर तक चली इस गरमागरम बहस के कारण बैठक का माहौल पूरी तरह अशांत रहा और निगम की कार्यवाही भी प्रभावित होती नजर आई।