चंदेरी से गोंड कला तक, गौहर महल में सजी स्वदेशी विरासत

भोपाल: 

राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को गौहर महल में राज्य स्तरीय स्वदेशी हैंडलूम मेला-2026 का शुभारंभ हुआ। मेले का शुभारंभ समाजसेवी रेणु देवड़ा ने किया। संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम तथा विकास आयुक्त (हाथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सहयोग से आयोजित यह मेला 14 अगस्त तक चलेगा। मेले का उद्देश्य हाथकरघा बुनकरों, शिल्पकारों और पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है। मेले के प्रभारी अरविंद शर्मा ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के 40 से 45 बुनकर और शिल्पकार अपने उत्कृष्ट उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं। मेले में मध्यप्रदेश की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत का व्यापक प्रदर्शन किया गया है। चंदेरी की विश्वप्रसिद्ध हल्की, महीन और सुनहरी जरी बॉर्डर वाली साड़ियां अपनी शाही गरिमा के कारण विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। महेश्वर की महेश्वरी साड़ियां और ड्रेस मटेरियल अपनी विशिष्ट किनारी, हल्के वजन और आकर्षक रंग संयोजन के कारण महिलाओं की पहली पसंद हैं। वारासिवनी और सौसर के सिल्क एवं कॉटन वस्त्र, कुर्तियां और हस्तनिर्मित परिधान भी बड़ी संख्या में खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं।

पारंपरिक डिजाइन बनी विशेष पहचान
प्रदर्शनी में बाग प्रिंट की प्राकृतिक रंगों से तैयार की गई सूती चादरें और परिधान, दाबू ब्लॉक प्रिंट की पारंपरिक मिट्टी प्रतिरोध छपाई तकनीक तथा बटिक कला से तैयार आकर्षक वस्त्र लोगों को लुभा रहे हैं। मालवा क्षेत्र की छपी हुई कपड़ा सामग्री भी अपनी पारंपरिक डिजाइनों के कारण विशेष पहचान बना रही है। टीकमगढ़ का बेल मेटल शिल्प अपनी धातु कला की बारीकी के लिए सराहा जा रहा है, जबकि भोपाल की जरी-जरदोजी का महीन हाथ का काम परिधानों को शाही स्वरूप प्रदान करता है। नीमच का बीड वर्क, जनजातीय आभूषण, पारंपरिक लकड़ी के खिलौने, पिथौरा और गोंड पेंटिंग मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक एवं जनजातीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। गोंड चित्रकला प्रकृति, वन्यजीवन और लोक आस्थाओं को रंगों के माध्यम से जीवंत करती है, वहीं पिथौरा कला जनजातीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक मानी जाती है।

एक जिला एक उत्पाद का विशेष प्रदर्शन
मेले में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया है, जिससे स्थानीय कारीगरों को अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही देश के अन्य राज्यों से आए बुनकर अपने क्षेत्र की विशिष्ट हथकरघा परंपराओं, हस्तनिर्मित वस्त्रों और शिल्प उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे आगंतुकों को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को एक ही स्थान पर देखने का अवसर मिल रहा है।

इन शिल्पियों का हुआ सम्मान
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विभाग द्वारा आयोजित हस्तशिल्प मेले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों एवं शिल्पियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर चंदेरी के रहीम खान, मो. जावेद, याकूब अंसारी, मो. आयाज, रामपाल सिंह कोली, मो. अजीम, जावेद अंसारी, ग्वालियर के दशरथ पाठिया, दीवानगंज की अनीशा बी, दरी बुनकर रियाकत अली, अफरोज जहां, फिरोज जहां, समीना वाजी तथा अर्पणा ताम्रकार सहित अन्य शिल्पियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विभाग के मेला प्रभारी अरविंद शर्मा, विपणन प्रबंधक रंजना निनावे, विकास प्रबंधक यशवंती श्रवण, हाथकरघा प्रबंधक योगेन्द्र जोनवार, प्रबंधक के.एल. नागर सहित सुरेन्द्र वर्मा और मिलिन्द मेंडी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अधिकारियों ने शिल्पियों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।