छात्रों ने बनाया स्मार्ट व्हीलचेयर ‘आरोग्य रथ’ तकनीक से दिव्यांगजनों की जिंदगी आसान बनाने की पहल
भोपाल :
विज्ञान के प्रति जिज्ञासा रखने वाले एक लेखक के रूप में जब विज्ञान मेले में विद्यार्थियों से मिलने का अवसर मिला, तो उनके प्रोजेक्ट से कहीं अधिक उनके भीतर छिपी सोच और संवेदनशीलता ने ध्यान आकर्षित किया। ‘आरोग्य रथ’ प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान जिस आत्मविश्वास, ऊर्जा और सहकारिता के भाव के साथ वे अपने मॉडल की जानकारी साझा कर रहे थे, वह वास्तव में प्रशंसनीय था। बच्चों के प्रयासों को दिशा देने और उनका मनोबल बढ़ाने में उनकी मार्गदर्शक शिक्षिका का सहयोग भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
तकनीक और नवाचार को यदि मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया जाए, तो विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसी के जीवन को आसान बनाने का माध्यम बन जाता है। इसी सोच का उदाहरण प्रस्तुत किया है सेंट जोसेफ्स को-एड स्कूल, एरिया कॉलोनी के विद्यार्थियों ने, जिन्होंने एक आधुनिक स्मार्ट व्हीलचेयर तैयार की है और इसे नाम दिया है—‘आरोग्य रथ’।
इस अभिनव परियोजना को तैयार करने वाले विद्यार्थियों में आराध्य सिंह रघुवंशी, शिखर प्रताप सिंह, आरोही चौरसिया और सुकृत द्विवेदी शामिल हैं।
‘आरोग्य रथ’ को सामान्य व्हीलचेयर से अलग बनाने के लिए विद्यार्थियों ने इसमें आधुनिक तकनीक और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न उपकरणों को शामिल करने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य ऐसे उपयोगकर्ताओं के आवागमन को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने में सहायता करना है, जिन्हें व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है।
आवाज से नियंत्रण से लेकर आपात सूचना तक
‘आरोग्य रथ’ में आवाज नियंत्रण प्रणाली दी गई है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता आवाज के जरिए व्हीलचेयर को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकता है। इसके साथ आपातकालीन एसओएस सुविधा भी रखी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए सूचना भेजी जा सके।
इसमें जीपीएस प्रणाली उपयोगकर्ता की स्थिति की जानकारी रखने में सहायता करती है, जबकि रिमोट नियंत्रण के माध्यम से व्हीलचेयर को नियंत्रित करने की सुविधा भी दी गई है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से इसमें नाड़ी मापने की व्यवस्था शामिल की गई है। वहीं बाधा पहचान प्रणाली रास्ते में आने वाली वस्तुओं को पहचानकर टक्कर की संभावना को कम करने में सहायता करती है। इस प्रकार विद्यार्थियों ने एक ही मॉडल में सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी से जुड़ी विभिन्न अवधारणाओं को जोड़ने का प्रयास किया है।
विज्ञान के साथ संवेदनशीलता भी
‘आरोग्य रथ’ की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल इसमें लगी तकनीक नहीं, बल्कि उस सोच में दिखाई देती है जिसके साथ इसे तैयार किया गया है। दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को समझना और फिर तकनीक के माध्यम से उनका समाधान खोजने का प्रयास विद्यार्थियों की सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
विज्ञान मेले में बच्चों को अपने मॉडल के बारे में उत्साहपूर्वक जानकारी देते देख यह अनुभव हुआ कि जब विद्यार्थियों को अपनी कल्पना को प्रयोग में बदलने का अवसर मिलता है, तो उनके भीतर आत्मविश्वास के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित होता है।
‘आरोग्य रथ’ हमें यह संदेश देता है कि नवाचार का मूल्य केवल इस बात से तय नहीं होता कि तकनीक कितनी आधुनिक है, बल्कि इससे भी तय होता है कि वह किसी व्यक्ति के जीवन में कितनी उपयोगिता और सुविधा ला सकती है।
इन विद्यार्थियों का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक संकेत है। स्कूल की प्रयोगशाला में तैयार हुआ यह मॉडल भले ही अभी एक विद्यार्थी परियोजना हो, लेकिन इसके पीछे छिपी सोच बड़ी है—विज्ञान ऐसा हो, जो मानव जीवन को अधिक सुरक्षित, सहज और सम्मानपूर्ण बनाने में अपना योगदान दे।
लेखक का प्रणाम उन बच्चों की जिज्ञासा, उनकी कल्पना और उस मार्गदर्शक शिक्षिका को, जिन्होंने इन विचारों को आकार देने में अपना योगदान दिया।

