गौहर महल के हैंडलूम एक्सपो में दिखी देशभर की बुनकरी की अनूठी विरासत

भोपाल :

पारंपरिक बुनकरी, महीन कारीगरी और देश के अलग-अलग हिस्सों की समृद्ध वस्त्र परंपराएं इन दिनों गौहर महल में एक ही छत के नीचे देखने को मिल रही हैं। विकास आयुक्त (हाथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, मध्यप्रदेश शासन तथा संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में स्टेट हैंडलूम एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। एक्सपो में देश के 16 राज्यों से आए करीब 50 से 65 बुनकर और शिल्पी अपने हाथकरघा उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं। यहां साड़ियों से लेकर शॉल, ड्रेस मटेरियल और घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक हाथ से बुनी विविध वस्तुओं का संग्रह देखने को मिल रहा है। एक्सपो में उत्तरप्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के शिल्पी अपनी क्षेत्रीय बुनकरी और शिल्प परंपरा को प्रस्तुत कर रहे हैं। अलग-अलग राज्यों के उत्पादों की बुनावट, रंग संयोजन और डिजाइन उनकी स्थानीय संस्कृति की पहचान को भी सामने लाते हैं।

कश्मीर का फेरन और पश्मीना
जम्मू-कश्मीर से आए शिल्पी जुनेद कश्मीरी अपने साथ पारंपरिक फेरन, पश्मीना शॉल, जॉर्जेट कुर्ती सहित विभिन्न प्रकार के ड्रेस मटेरियल लेकर आए हैं। उनके स्टॉल पर कश्मीरी पारंपरिक परिधान के साथ कपड़ों की विविध रेंज देखने को मिल रही है। वे बताते हैं कि इस बार कॉटन कानी साड़ी विशेष आकर्षण का केंद्र है। कानी बुनाई की पारंपरिक तकनीक में महीन डिजाइन और पैटर्न कपड़े की खूबसूरती को अलग पहचान देते हैं।

बालूचरी, पटोला और सिल्क की खास रेंज
पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध बालूचरी साड़ियां एक्सपो में आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। इन साड़ियों की पहचान उनकी बारीक बुनाई और पल्लू व बॉर्डर पर उकेरे गए पारंपरिक डिजाइन हैं। वहीं छत्तीसगढ़ से आए शिल्पियों के स्टॉल पर कोसा और टसर के उत्पाद उपलब्ध हैं। प्राकृतिक चमक और विशिष्ट बनावट वाले इन कपड़ों की अपनी अलग पहचान है। गुजरात का पटोला अपनी जटिल बुनाई, आकर्षक ज्यामितीय पैटर्न और पारंपरिक रंग संयोजन के लिए जाना जाता है। कर्नाटक की मैसूर सिल्क भी एक्सपो में मौजूद है, जो अपनी मुलायम बनावट और सुरुचिपूर्ण चमक के कारण पसंद की जा रही है। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिल्पी क्षेत्रीय पहचान वाले हाथकरघा उत्पाद लेकर पहुंचे हैं।

चंदेरी-महेश्वर की बुनाई भी शामिल
मध्यप्रदेश की पहचान रखने वाली चंदेरी और महेश्वर की बुनकरी भी एक्सपो में मौजूद है। चंदेरी से आईं शिल्पी तस्लीम अली चंदेरी और महेश्वर में तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित कर रही हैं। महीन कपड़े, हल्की बनावट और पारंपरिक बुनाई इन उत्पादों की प्रमुख विशेषताएं हैं।

हाथ से बनी दरी में ऊन की गर्माहट
उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर से आए अजीज अहमद विशेष रूप से हैंडमेड दरी लेकर पहुंचे हैं। इन दरियों में 20 प्रतिशत कॉटन और 80 प्रतिशत ऊन का इस्तेमाल किया जाता है। ऊन की अधिक मात्रा के कारण दरी में मजबूती और गर्माहट आती है, जबकि कॉटन इसकी बुनावट को संतुलित बनाता है। हाथ से तैयार होने के कारण प्रत्येक दरी में बुनकर की मेहनत और पारंपरिक शिल्प कौशल की झलक दिखाई देती है।