राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत मैत्री योजना से सचिन तिवारी बने आत्मनिर्भर
भोपाल:
ग्राम बावली, ग्राम पंचायत पादां, विकासखंड सारंगपुर, जिला राजगढ़ निवासी सचिन तिवारी ने कक्षा 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद खेती को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। अतिरिक्त आय के लिए वे समय मिलने पर एक दुकान पर भी कार्य करते थे। सीमित रोजगार अवसरों के कारण उनकी मासिक आय लगभग ₹8,000 थी।
इसी दौरान विकासखंड अधिकारी डॉ.अमित शाक्या ने उन्हें राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के अंतर्गत संचालित मैत्री योजना की जानकारी दी। उन्होंने योजना के उद्देश्य, प्रशिक्षण और मैत्री कार्यकर्ता के रूप में उपलब्ध स्वरोजगार के अवसरों के बारे में सचिन तिवारी को जानकारी दी। मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से प्रेरित होकर तिवारी ने योजना से जुड़ने का निर्णय लिया।
योजना के अंतर्गत उन्होंने तीन माह का प्रशिक्षण भोपाल में सफलतापूर्वक पूर्ण किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में मैत्री कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं प्रारंभ कीं। अब वे गांव-गांव जाकर पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन से संबंधित आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
आय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि
मैत्री योजना से जुड़ने से पहले सचिन तिवारी खेती, दूध विक्रय और अन्य छोटे-मोटे कार्यों से लगभग ₹8,000 प्रतिमाह आय अर्जित करते थे। मैत्री कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं प्रारंभ करने के बाद उनकी वर्तमान मासिक आय बढ़कर लगभग ₹30,000 हो गई है। इस प्रकार उनकी आय में करीब ₹22,000 प्रतिमाह की वृद्धि हुई है। बढ़ी हुई आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उन्हें स्थायी स्वरोजगार के साथ भविष्य के प्रति आत्मविश्वास भी मिला है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
सचिन तिवारी बताते हैं कि मैत्री योजना उनके लिए केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर साबित हुई है। योजना के माध्यम से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से उन्हें पशुपालकों की सेवा करने के साथ अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर मिला।
वे योजना की जानकारी देने और प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए विकासखंड अधिकारी डॉ. अमित शाक्या के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। तिवारी का कहना है कि वे भविष्य में भी पूरी निष्ठा और लगन से पशुपालकों को सेवाएं प्रदान करते हुए पशु स्वास्थ्य, प्रजनन एवं पशुपालन क्षेत्र के विकास में योगदान देते रहेंगे।
सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो ग्रामीण युवा अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सचिन तिवारी की सफलता की कहानी इसी विश्वास को साकार करती है।

