करोड़ों की लागत से बन रहा बरही कॉलेज का भवन सवालों के घेरे में, वर्षों से कछुए की चाल चल रहा निर्माण
बरही/कटनी
शासकीय महाविद्यालय बरही में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए करोड़ों रुपये की लागत से कराया जा रहा अतिरिक्त भवन निर्माण अब अपनी धीमी रफ्तार और निर्माण व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। वर्षों से चल रहे निर्माण कार्य के बावजूद भवन का काम पूरा नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों का आरोप है कि निर्माण की गति के साथ-साथ गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बरही महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण अतिरिक्त कक्षों और भवन की मांग लंबे समय से उठती रही थी। विद्यार्थियों की ओर से आंदोलन और महाविद्यालय प्रबंधन के पत्राचार के बाद इस दिशा में पहल हुई। क्षेत्रीय लोगों ने भी विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के समक्ष महाविद्यालय की भवन संबंधी समस्या रखी थी, जिसके बाद अतिरिक्त भवन निर्माण का रास्ता साफ हुआ। उम्मीद थी कि नया भवन बनने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति ने अब पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले किसी भी शासकीय निर्माण में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है। निर्माण स्थल पर कार्य से संबंधित जानकारी देने वाला सूचना बोर्ड तक दिखाई नहीं देने की बात सामने आ रही है। सामान्य तौर पर ऐसे बोर्ड पर स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की अवधि, योजना अथवा मद, संबंधित विभाग तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी दर्ज रहती है। ऐसे में निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड का न होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच और तकनीकी निगरानी की व्यवस्था स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं, इसकी वास्तविक पुष्टि सक्षम तकनीकी अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में मांग उठ रही है कि भवन निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पूर्व में निर्माण स्थल से सामने आई तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। एक तस्वीर में वृद्ध महिला द्वारा मिस्त्री के औजार की जगह हाथ से मसाला लगाने की बात भी चर्चा में रही। हालांकि इन तस्वीरों और उनसे जुड़े आरोपों की तकनीकी पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही संभव है। इसके बावजूद इतना जरूर है कि करोड़ों रुपये के शासकीय भवन निर्माण में इंजीनियरिंग निगरानी और निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल निर्माण की रफ्तार को लेकर है। वर्षों से निर्माणाधीन भवन अब तक विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं हो सका है। जिस भवन से महाविद्यालय में कक्षों की कमी दूर होने और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का वातावरण मिलने की उम्मीद थी, उसका निर्माण लंबा खिंचने से विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों में असंतोष की स्थिति बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी मौके का तकनीकी निरीक्षण करें। भवन की नींव से लेकर निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री और अब तक हुए कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही स्वीकृत लागत, निर्माण अवधि, कार्य एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों से जुड़ी जानकारी निर्माण स्थल पर सार्वजनिक की जाए। वर्षों से चल रहे निर्माण में देरी के कारणों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
महाविद्यालय का यह भवन सीधे विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ा है। इसलिए सवाल सिर्फ निर्माण पूरा होने का नहीं, बल्कि यह भी है कि भवन निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार हो। अब निगाहें प्रशासनिक और तकनीकी जांच पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविकता सामने आती है या करोड़ों की लागत वाला यह भवन आगे भी धीमी रफ्तार और आरोपों के बीच ही बनता रहेगा।

