बरही नगर में समस्या कायम, पार्षद फरमा रहे आराम जनता हो रही बेहाल 15 वार्डों में वर्षों से जमी समस्याएं, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

कटनी:

कटनी जिले के बरही नगर परिषद के वार्डों में लंबे समय से चली आ रही समस्याएं अब जनता के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं। आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, टूटी सड़कें, जाम नालियां और गंदगी जैसी मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद बरही में कुल 15 वार्ड हैं ऐसा कोई वार्ड बकाया न होगा कि एक न एक गम्भीर समस्या न हो चाह गंदगी कि बात हो चाह पानी निकासी कि हो चाह सड़क कि बिजली पानी कि हो या फिर शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने कि बात हो ऐसी समस्याएं चार तीन से चार वर्षों से बनी हुई है, लेकिन न तो कोई स्थायी समाधान निकाला गया और न ही जिम्मेदारों द्वारा गंभीरता दिखाई गई। वार्ड पार्षद, जिनकी प्राथमिक जिम्मेदारी इन समस्याओं का समाधान करना है, वे अब अपनी भूमिका से दूर नजर आ रहे हैं। न तो वार्डो में निरीक्षण किया जाता है और न ही जनता कि समस्याओ को जानने का प्रयास किया जाता है जिसके कारण वार्डो कि जनता को स्वयं संघर्ष करना पड़ रहा है ।

जनता परेशान, जिम्मेदार बेपरवाह बरही नगर में बिगड़ते हालात

मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आम जनजीवन प्रभावित, पार्षदों की निष्क्रियता उजागर

बरही नगर के विभिन्न वार्डों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। टूटी सड़कों से आवागमन मुश्किल हो गया है, नालियों की सफाई न होने से गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, वहीं आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन जनप्रतिनिधियों को इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए, वे आखिर मौन क्यों हैं? वर्षों से एक ही समस्या का बने रहना यह दर्शाता है कि या तो इच्छाशक्ति की कमी है या फिर जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही की जा रही है।

विकास के नाम पर दिखावा, बरही नगर में भ्रष्टाचार के आरोप

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, एक साल में ही उखड़ रही सड़कें

बरही नगर परिषद के वार्डो में हुए विकास कार्य अब संदेह के घेरे में हैं। सड़क, नाली और अन्य निर्माण कार्य शुरू होते ही गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो जाते हैं। कई जगहों पर नई बनी सड़कें एक वर्ष के भीतर ही खराब हो जाती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ जा और आज भी हो रहा है। इसके बावजूद वार्ड पार्षदों की चुप्पी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है।

जनता का भरोसा टूटा, पार्षदों की जिम्मेदारी छूटी

चार वर्षों से एक ही समस्या, समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन

जनता ने जिस विश्वास के साथ अपने वार्ड पार्षद को चुना था, आज वही भरोसा टूटता हुआ नजर आ रहा है। समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं।

जनता का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। अब लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे जवाब मांग रहे हैं।

इसके अलावा नगर में फैली अव्यवस्थाएं अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए एक बड़ा सवाल बन चुकी हैं। जब जनप्रतिनिधि ही मौन साध लें, तो जनता की उम्मीदें टूटना स्वाभाविक है।

अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी समझें और जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से करें।